शक करना सही है या गलत ?

नमस्ते दोस्तों, कैसे हो आप? आज हम बात करने वाले हैं  शक करना सही है या गलत ,जब हम इस दुनिया में जन्म लेते हैं, तो जन्म के साथ ही हमें बहुत सारे रिश्ते निभाने पड़ते हैं। रिश्ते निभाने के लिए बहुत ही प्यार, सम्मान, विश्वास और संयम की जरूरत होती है। कठिन वक्त आने पर एक दूसरे का साथ देना पड़ता है। चाहे आप में कड़वाहट हो या ना हो, आपको कठिन समय में अपनों का साथ देना होता है। कई बार रिश्तो में किसी कारणों की वजह से शक पैदा हो जाता है। सामान्य शक करना कोई गलत बात नहीं है। किसी भी रिश्ते में शक का पैदा होना खतरे का संकेत होता है।

बिना किसी वजह के शक करने से और दुर्व्यवहार करने से रिश्ते खत्म होने के कगार पर आ जाते हैं। लेकिन, शकी मिजाज़ वाले लोग इसे समझ नहीं पाते हैं। पति पत्नी में अक्सर नोकझोंक होती रहती है, वह उनके रिश्ते का अभिन्न अंग होता है। लेकिन, अगर शक करने की बीमारी लग जाए या आदत लग जाए; तो रिश्ते के लिए यह बहुत ही खतरनाक साबित हो सकता है। बिना किसी सबूत के शक करना गलत बात होती है। सिर्फ पति-पत्नी के रिश्ते ही में ही नहीं, ऐसे अन्य रिश्तो में भी शक जहर घोल देता है। रिश्ते निभाने में यह शक बहुत बड़ी बाधा डालता है। दोस्तों, आज जानेंगे शक करना सही है या गलत

धोखा मिलना-

कई बार रिश्ते में धोखा मिलने की वजह से भी हमें शक करने की आदत लग जाती है। यह खासकर लड़कियों के बारे में होता है। अगर किसी लड़की का ब्रेकअप हो जाए या किसी की शादी टूट जाए, तो आगे जाकर वह किसी इंसान पर भरोसा करने से डरती है और उसकी हर बात पर शक करने लग जाती है। यह लाजमी है, कि धोखा मिलने के बाद आप शक करें।

लेकिन, आपके पार्टनर के ऊपर आपको भरोसा रखना चाहिए और उसकी आदतों के बारे में जान लेना चाहिए। जरूरी नहीं होता है, कि हर इंसान एक जैसा ही हो! जैसे आपका पिछला अनुभव खराब रहा हो, तो आगे का अनुभव भी खराब रहेगा; यह जरूरी नहीं है। इसीलिए, हर इंसान को परखना चाहिए और हर बार शक नहीं करना चाहिए।

बेवजह शक-

दोस्तों, रिश्ते बहुत ही नाजुक होते हैं। उनको संभाल कर रखने के लिए संयम की जरूरत होती है। बेवजह किया गया शक हर रिश्ते के लिए हानिकारक होता है। जब तक आप अपने पार्टनर को कोई गलत काम करते हुए देख ना ले, तब तक किसी भी व्यक्ति के बातों पर विश्वास ना करें। क्योंकि, ऐसा भी हो सकता है; कि किसी ने आपके कान भर रहा हो और आप उसी पर विश्वास रख रहे हो।

इसलिए बेहतर है, कि आप खुद सतर्क हो जाएं और हर चीज को परखकर उस पर प्रतिक्रिया दें। जब तक आपको कोई सबूत, प्रमाण ना मिल जाए, तब तक आप किसी पर भी शक नहीं कर सकते और करना भी नहीं चाहिए। क्योंकि, जब उस इंसान को इस बारे में पता चलता है तो उसे बहुत दुख हो सकता है।

सकारात्मकता-

आप चाहे लड़की हो या लड़का, आपको अपने पार्टनर पर भरोसा रखना चाहिए और हमेशा उसके बारे में सकारात्मक विचार करना चाहिए। रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स के अनुसार, शक जैसी आदतों को कम करने के लिए आपस में बातचीत करना जरूरी होता है। बातचीत करने से परेशानियों का हल निकलता है और शक उत्पन्न नहीं होता है।

अपने पार्टनर का चयन करने से पहले, उसके बारे में अच्छे से जानकारी प्राप्त कर लें। जब भी कोई रिलेशनशिप में होता है, तो वह लोग एक दूसरे को बहुत समय से जानते हैं। ऐसा नहीं है, कि किसी अनजान के साथ आप भावनात्मक संबंध बना रहे हो। इसीलिए, एक दूसरे को वक्त दे, एक दूसरे को समझने की कोशिश करें और सकारात्मक रहकर शक जैसी बीमारी को अपने रिलेशनशिप से दूर रखें।

शक की बीमारी-

साइकोलॉजिस्ट के अध्ययन से पता चला है, कि बहुत सारे लोगों को शक करने की बीमारी हो जाती है। वह मन ही मन में कुछ कल्पना करते हैं और वही सच मान बैठते हैं। ऐसे में शक पैदा हो जाता है और रिश्तो में दरार आ जाती हैं। ऐसे लोग हमेशा ही नकारात्मक सोच में रहते हैं। वह किसी के बारे में भी सकारात्मक सोच ही नहीं पाते हैं। अगर नकारात्मक सोच और शक आप पर हावी हो रहा है, तो आप किसी एक्सपर्ट की सलाह ले सकते हैं।

डॉक्टर की सलाह-

अगर आपका जीवनसाथी कुछ ज्यादा ही शक कर रहा हो तो ऐसे में आप साइकोलॉजिस्ट की मदद ले सकते हैं। डॉक्टर के अध्ययन के अनुसार यह पता चला है, कि अगर ऐसे लोगों को जल्द ही इलाज करवाया जाए; तो वह एक नॉर्मल जिंदगी जी सकते हैं। इसीलिए, अपने पार्टनर को विश्वास दिलाकर उसे डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए।

सिडोफ्रेमिया-

वैसे तो, शक करना एक आम बात होती है। अगर साधारण सा शक हो, तो उसमें कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन, कुछ लोगों को इस चीज की आदत लग जाती हैं और उनकी मानसिकता बहुत ही नकारात्मक हो जाती है।  डॉक्टर के अनुसार, ऐसे लोगों को शक करने की बीमारी लग जाती है; जिसे मतिभ्रम कहा जाता है। उसी को “सिडोफ्रेमिया” कहते हैं।  वक्त रहते हुए इसका इलाज किया जाए, तो यह काफी हद तक काबू में आ सकती है।

सिडोफ्रेमिया के लक्षण-

सिडोफ्रिमिया से ग्रसित व्यक्ति में अलग अलग लक्षण दिखाई देते हैं। इस समस्या से पीड़ित रोगी को कल्पनिक आवाजें सुनाई देने लगती है। उसका रवैया दिन पर दिन हिंसक होते जाता है। इसी के साथ, ऐसे रोगी में शक और वहम की समस्या बढ़ने लगती हैं।

कैसे करे मरीज के साथ व्यवहार-

सबसे पहले तो सिडोफ्रेमिया के रोगी को प्यार और आधार की आवश्यकता होती है। ऐसे मरीज के साथ हमेशा ही प्यार और अपनेपन से पेश आना चाहिए। उसे यह बीमारी हुई है, इस बात का एहसास नहीं कराना चाहिए। उससे हमेशा ही सकारात्मक भरी बातें करनी चाहिए। ऐसी समस्या से ग्रसित व्यक्ति को यह विश्वास दिलाना चाहिए, कि वह इस समस्या से ऊभर सकता है और वह एक नॉर्मल जिंदगी जी सकता है। इसी के साथ, जितना जल्दी हो सके उतना जल्दी डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

दोस्तों, शक करना बहुत बुरी बात होती है। इससे बहुत सारे रिश्ते टूटने की कगार पर आ जाते हैं। मस्ती भरे और नोकझोंक भरे रिश्ते में शक करना एक आम बात मानी जाती है और वह ज्यादा सीरियस भी नहीं होता है। लेकिन, अगर आप बहुत ज्यादा नकारात्मक होकर इस बात की तरफ देखते हैं; तो आपके रिश्ते के लिए यह खतरा साबित हो सकती हैं। इसलिए, इस शक की आदत से बाहर आने के लिए अपने पार्टनर कि मदद जरूर करें।

उम्मीद है, दोस्तों आपको आज का शक करना सही है या गलत यह ब्लॉग अच्छा लगा हो। धन्यवाद।

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