सोराइसिस में कौन सा साबुन लगाना चाहिए

नमस्ते दोस्तों, कैसे हो आप? आज का हमारा विषय है सोराइसिस में कौन सा साबुन लगाना चाहिए,सोरायसिस त्वचा संबंधित एक ऐसी बीमारी है; जिसमें त्वचा की कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती है। यह एक ऐसी बीमारी है, जो बार-बार होती रहती है और वक्त के साथ बद से बदतर हो जाती है। आमतौर पर, हमारी त्वचा की कोशिकाएं सैल रीजनरेट करती है, जो २८ दिनों में होता है और यह एक सामान्य स्थिति होती हैं। लेकिन, सोरायसिस के मरीजों में यह सैल रीजनरेशन ४-५ दिनों में ही होता है। इसी कारण, कोशिकाओं का जमना शुरू हो जाता है। यह बीमारी ऑटोइम्यून डिजीज के प्रकार में मोडी जा सकती हैं।

क्योंकि, शारीरिक रोग प्रतिकारक क्षमता के में गड़बड़ी होने के कारण यह बीमारी होती है। सोराइसिस में त्वचा पर लाल, परतदार चकत्ते पड़ जाते हैं और इसी कारण खुजली वाले तथा शुष्क पैचस पड़ जाते हैं। सोरायसिस के मरीजों को इससे काफी तकलीफ होती हैं। सोरायसिस से प्रभावित त्वचा का हिस्सा काफी ड्राई और रुखा सुखा हो जाता है। इसकी वजह से प्रभावित हिस्से पर जलन, खुजली होने लगती है। यहां तक कि वहां से पपड़ी भी निकलने लगती है। तो दोस्तों, ऐसे में आपको जल्द ही डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। इसी के साथ, आज हम बात करने वाले हैं सोराइसिस में कौन सा साबुन लगाना चाहिए

सोराइसिस के कारण

सोराइसिस के कई कारण हो सकते हैं।

१) हार्मोनल असंतुलन-

महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान हार्मोन्स में काफी असंतुलन देखा जाता है। इसी के साथ, डिलीवरी के बाद भी हार्मोन्स को  बैलेंस होने में काफी वक्त लगता है। गर्भावस्था के दौरान और डिलीवरी के बाद महिलाओं में सोरायसिस की समस्या देखी जा सकती हैं। इसी के साथ, प्यूबर्टी या मेनोपॉज के दौरान भी यह समस्या देखी जा सकती हैं।

२) इम्यून सिस्टम-

हमारे शरीर की रक्षा प्रणाली संतुलन से काम करती हैं, तो हमारे शरीर को कई सारे बैक्टीरियल और वायरल इन्फेक्शन से बचाती है। लेकिन, इम्यून सिस्टम में अगर कुछ गड़बड़ी आ जाएं; तो इसके विपरीत परिणाम भी देखने को मिल सकते हैं। इम्यून सिस्टम ओवरएक्टिव हो जाने की वजह से त्वचा में अधिक कोशिकाओं का उत्पादन होता है। अतिरिक्त कोशिकाएं त्वचा की सतह पर जमा होना शुरू हो जाता है। त्वचा की इन कोशिकाओं का ढेर जो आप अपने त्वचा पर देखते हैं, उसे ही सोरायसिस कहते हैं। इम्यून सिस्टम में गड़बड़ी सोरायसिस का प्रमुख कारण माना गया है।

३) मेडिसिन-

कभी-कभी कुछ दवाइयां लेने के बाद भी सोरायसिस का खतरा बढ़ सकता है। जैसे, हाई बीपी की दवाई, मलेरिया की दवाइयां और मानसिक बीमारी का इलाज करने वाली दवाइयां भी सोरायसिस का कारण बनती हैं। इसीलिए, किसी भी दवाई को लेने से पहले डॉक्टर से उचित परामर्श ले और उसके साइड इफेक्ट जरूर जान ले।

४) शराब-

शराब के सेवन से भी सोरायसिस का खतरा बढ़ता है। सिर्फ यही नहीं; सोरायसिस का ट्रीटमेंट चल रहा हो, तो उसमें भी शराब अवरोध उत्पन्न करती हैं।

सोराइसिस के लक्षण

सोरायसिस के निम्नलिखित लक्षण होते हैं।

१) मरीजों के सिर में स्केल्स, धब्बे या पपड़ी बनना।

२) सोरायसिस के मरीजों के हाथों और पैरों की उंगलियों के नाखूनों का रंग बदलना। इसी के साथ, नाखून जड़ से उखाड़ने लगना और टूट जाना।

३) त्वचा पर लाल चकत्ते पड़ना और वह परतदार स्कैल्स से ढक जाना।

४) त्वचा पर पड़े परतदार चकत्तो में खुजली होना, दर्द होना और दारारे पड़ना।

सोराइसिस में कौनसा साबुन लगाना चाहिए

यह एक ऐसी बीमारी है, जो डॉक्टर के इलाज द्वारा सही होती हैं। लेकिन, कई बार सोरायसिस के मरीजों को रूखी और बेजान त्वचा हो जाने से काफी तकलीफ महसूस होती हैं। तो ऐसे में कुछ ऐसे साबुन का इस्तेमाल किया जा सकता है; जिससे त्वचा के प्रभावित हिस्से को नमी प्रदान हो सके और त्वचा अन्य किसी संक्रमण से बच सकें।

१) बेसिस सेंसेटिव स्किन सोप-

यह एक प्राकृतिक साबुन है; जिसमें एलोवेरा और कैमोमाइल के तत्व शामिल है। एलोवेरा रूखी, सूखी त्वचा में जल्दी समा जाता है और उसे नमी तथा पोषण प्रदान करता है। वही कैमोमाइल एक एंटीसेप्टिक युक्त घटक है; जो सोरायसिस और एग्जिमा जैसी त्वचा संबंधित बीमारियों के लक्षणों से काफी हद तक राहत दिलाता है। लाल चकत्ते, खुजली, जलन आदि समस्याओं से कैमोमाइल का इस्तेमाल करके निजात पा सकते हैं। सोरायसिस के मरीजों को इस साबुन का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए।

२) एस्पेन नेचुरल डेड सी मड सोप-

इस साबुन को बनाते वक्त मृत समुद्री मिट्टी, शिया बटर, एक्टिवेटेड चारकोल, ऑलिव ऑयल, ऑर्गेनिक सन फ्लॉवर ऑयल, कैस्टर ऑयल और पाम ऑयल का इस्तेमाल किया गया है। मृत समुद्री मिट्टी और एक्टिवेटेड चारकोल त्वचा को गहराई से साफ करता है। त्वचा में जमी एक्स्ट्रा ऑयल, धूल, अशुद्धियां, मैल और मृत कोशिकाओं को हटाता है। एक्टिवेटेड चारकोल त्वचा को डिटॉक्सिफाई करता है। मृत समुद्र मिट्टी में पोटेशियम, मैग्नीशियम, सोडियम जैसे खनिज तत्व पाए जाते हैं; जो आपकी त्वचा को काफी हद तक पोषण प्रदान करते हैं। सोरायसिस के मरीजों की त्वचा काफी रूखी सुखी हो जाती हैं; इसलिए उनके लिए यह साबुन काफी अच्छा साबित हो सकता है।

३) टॉम्स ऑफ मरीन नेचुरल ब्यूटी सोप-

यह साबुन वर्जिन कोकोनट ऑयल, पाम ऑयल, रॉ शिया बटर, मोरक्कन ऑर्गन ऑयल से तैयार किया गया है। वर्जिन कोकोनट ऑयल त्वचा को पोषण प्रदान करता है, सोरायसिस की वजह से आई सूजन में राहत दिलाता है और घाव को ठीक करने में भी मदद करता है। शिया बटर और मोरक्कन अर्गन ऑयल त्वचा को काफी हद तक नमी प्रदान करते हैं और त्वचा को रुखी होने से बचाते हैं। इस साबुन का इस्तेमाल करने से त्वचा नर्म मुलायम और मॉश्चराइज बनी रहती हैं। इस साबुन का इस्तेमाल सोरायसिस के काफी लक्षणों से राहत दिलाता है।

४) ट्रू अर्थ एसेंशियल सेंसेटिव स्किन सोप-

यह साबुन पूरी तरह से प्राकृतिक घटकों से निर्मित है। इसमें जैतून का तेल, ताड़ का तेल, नारियल तेल, लैवेंडर एसेंशियल ऑयल और मेहंदी जैसे प्राकृतिक तत्व मौजूद होते हैं। इस साबुन का इस्तेमाल सोरायसिस के लक्षणों में काफी हद तक राहत दिलाता है। इसके उपयोग के बाद त्वचा में नमी बनी रहती है। इसमें इस्तेमाल किए गए प्राकृतिक घटक संवेदनशील त्वचा के लिए बहुत ही गुणकारी होते हैं। त्वचा को मॉइश्चराइज और कंडीशन करने का काम यह साबुन करता है।

५) सोराइसिस हनी जेंटल ओटमील एंड साल्ट सोप-

इस साबुन का प्रयोग त्वचा को पोषण प्रदान करते हुए त्वचा को हाइड्रेटेड रखता है। रूखी, बेजान और खुजली वाली त्वचा को राहत दिलाता है। सोरायसिस में एक साबुन का प्रयोग काफी फायदेमंद साबित होता है इस काबिल नहीं शहद, नारियल का तेल जैसे घातक होते हैं; जो चाचा को कोमल बनाते हैं।

दोस्तों, आज के लिए बस इतना ही। उम्मीद है, आपको आज का सोराइसिस में कौन सा साबुन लगाना चाहिए यह ब्लॉग अच्छा लगा हो। धन्यवाद।

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