पीरियड का कम आना क्या होता है ?

नमस्ते दोस्तों, कैसे हो आप? आज का हमारा विषय है पीरियड का कम आना क्या होता है,मासिक धर्म हर महिला के लिए कई सारी परेशानियां साथ लेकर आता है। मां बनने की इच्छा रखने वाली महिलाओं के लिए मासिक धर्म का नियमित होना बहुत ही आवश्यक होता है। मासिक धर्म नियमित होना एक महिला के स्वस्थता का लक्षण होता है। सामान्य तौर पर, मासिक चक्र दो से सात दिनों तक का होता है। शारीरिक बदलाव के कारण इसमें कभी-कभी बाधा उत्पन्न हो सकती हैं। महिलाओं में मासिक धर्म को लेकर काफी हिचकिचाहट देखने को मिलती हैं। 

मासिक धर्म में अगर कोई अनियमितता आ भी जाए; तो किसी के साथ चर्चा करने या बात करने में महिलाएं कतराती हैं। इस विषय पर आज भी समाज में खुलकर बातें ना होने के कारण महिलाओं को कई सारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पीरियड्स का कम आना, मासिक चक्र की एक परेशानी के तौर पर उभर कर आ रही हैं। वैसे तो, हर महीने आने वाले पीरियड में ब्लड फ्लो कम या अधिक हो सकता है। यह हार्मोनल बदलाव, लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव और हमारे वजन में बदलाव के कारण हो सकता है। 

कभी हमारे पीरियड्स चार दिन की बजाय २-३ दिन में ही खत्म हो सकते हैं। लेकिन, ज्यादा महीनों तक आपको यह परेशानी दिख रही हो; तो यह चिंता का कारण हो सकता है। पीरियड के कम आने का मतलब माहवारी के दौरान आपको बहुत कम दिनों तक और बहुत कम मात्रा में रक्त स्राव होना। इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए कुछ घरेलू नुस्खे भी आजमा सकते हैं। इसी के साथ, फर्क नजर ना आने पर आप डॉक्टर के पास जाकर भी ट्रीटमेंट करवा सकती हैं। लेकिन, कभी भी मासिक धर्म से जुड़ी कोई भी परेशानी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। क्योंकि, यह की प्रजनन क्षमता पर असर डाल सकता है। तो दोस्तों, आज जानेंगे पीरियड का कम आना क्या होता है

पीरियड्स का कम आने के कारण

बढ़ती उम्र से लेकर तनाव तक, पीरियड कम आने के ऐसे कई अन्य कारण देखे जा सकते हैं।

१) स्ट्रेस-

काम और घर की जिम्मेदारियों की वजह से हम तनाव ग्रस्त जीवन पद्धति जीने के लिए मजबूर हो गए हैं। हम चाहे कितनी भी कोशिश करें, कभी ना कभी जिंदगी में हमें तनाव का सामना करना ही होता है। खासकर महिलाओं को घर की और बाहर की जिम्मेदारियां संभालने होती है; इस चक्कर में तो स्ट्रेस आ ही जाता है। लेकिन, इसी स्ट्रेस के कारण उनके शरीर में हार्मोनल इंबैलेंस हो जाता है और उन्हें पीरियड कम आना या लाइट पीरियड जैसी समस्या उत्पन्न हो जाती है। स्ट्रेस सीधे तौर पर हमारे हार्मोन्स को प्रभावित करता है; जिस कारण हमारे पीरियड में गड़बड़ी आ सकती हैं।

२) ओवुलेशन में गड़बड़ी-

कई बार किसी मेंस्ट्रूअल साइकिल में ओवुलेशन ठीक तरीके से नहीं होता है और एग रिलीज नहीं हो पाता है; इस समस्या को “अनओवुलेशन” या ओवुलेशन ना होना कहा जाता है। इस समस्या के कारण भी लाइट पीरियड्स की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

३) वजन-

कई महिलाएं अंडर वेट होने के कारण उनके शरीर में फैट्स की लेवल काफी कम होती है। फैट्स की लेवल कम होने के कारण ओवुलेशन ठीक तरह से नहीं होता है। अंडरवेट होने के कारण इन महिलाओं में लाइट पीरियड्स आने की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

४) बढ़ती उम्र-

बढ़ती उम्र के साथ पीरियड्स कम होना, इस स्थिति की संभावना बढ़ जाती है। महिलाओं को अलग-अलग उम्र में विभिन्न प्रकार के पीरियड का फ्लो देखने को मिलता है। नियमित तौर पर २० से ३५ उम्र की महिलाओं में सामान्य तौर पर पीरियड आते हैं। बढ़ती उम्र के साथ पीरियड लाइट होना या हैवी होना जैसी अनियमितता देखने को मिलती हैं।

पीरियड्स का कम होने के लक्षण-

लगातार कई महीनो तक पीरियड का कम आना एक गंभीर समस्या की तरफ संकेत करती है। इसीलिए, इसके लक्षणों को तुरंत पहचानना जरूरी हो जाता है। आइए जानते हैं, पीरियड्स के कम होने के लक्षण।

१) बिल्डिंग बहुत कम होना।

२) बिल्डिंग में ब्लड क्लॉट्स दिखाई देना।

३) रक्तस्त्राव काफी कम दिनों के लिए होना।

४) लगातार दो से तीन महीनों तक मासिक धर्म के दौरान रक्तस्राव कम होना।

पीरियड्स के कम होने के घरेलू उपाय

अगर पीरियड्स में ब्लड कम आने की समस्या लगातार दो से तीन महीनों तक होती रही है और आपको इसी के साथ अन्य स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा है; तो कुछ घरेलू इलाज अपनाए जा सकते हैं।

१) गुड़ और तिल-

गुड और तिल का सेवन करने से पीरियड्स कम आने की समस्या में काफी हद तक राहत देखी जा सकती है। दरअसल, गुड और तिल दोनों ही गर्म तासीर वाले होते हैं। इसीलिए; थोड़ी-थोड़ी मात्रा में मिलाकर इनका सेवन करने से पीरियड के दौरान रक्तस्त्राव को रेगुलर किया जा सकता है। इसका सेवन करने से माहवारी के दौरान खून रूकने अथवा खून के थक्के जमने की समस्या नहीं होती हैं; जिस कारण महावारी खुलकर आ सकती हैं। इसी के साथ, गुड और तिल का साथ मिलाकर सेवन करने से पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द तथा ऐठन से भी राहत मिलती है। इसीलिए, माहवारी शुरू होने से पहले या महावारी के दौरान गुड़ और तिल का सेवन अवश्य करें।

२) गाजर-

गाजर विटामिन, आयरन तथा मिनरल्स से भरपूर होता है। गाजर का सेवन करने से शरीर को उचित मात्रा में आयरन मिलता है; जिससे खून की कमी को पूरा किया जा सकता है। इसी कारण, पीरियड खुलकर आते हैं। वहीं दूसरी ओर, गाजर में कैरोटीन पाया जाता है; जो एस्ट्रोजन हार्मोन का संतुलन बनाए रखता है। हार्मोन का स्तर संतुलित रहने के कारण पीरियड में खून रुकने की समस्या नहीं होती है और पीरियड खुलकर आते हैं। रोजाना अपने आहार में गाजर का जूस या सलाद के रूप में गाजर का सेवन अवश्य करें। गाजर खाने से हमारे पीरियड को रेगुलर करने में काफी हद तक मदद मिलती है।

३) पपीता-

महिलाओं में रोजाना पपीते का सेवन करने से रक्त प्रवाह सुचारु रुप से होता है; जिस कारण पीरियड्स में कोई भी बाधा उत्पन्न नहीं होती हैं। गाजर की तरह पपीते में भी कैरोटीन की अच्छी खासी मात्रा पाई जाती है। इसी कारण, पपीते का सेवन करने से शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन को संतुलित बनाए रखने में मदद मिलती हैं। हार्मोंस संतुलित रहने के कारण हमारे पीरियड खुल कर आते हैं। महिलाओं के लिए पपीते का सेवन बहुत ही फायदेमंद साबित होता है। कई महिलाओं को माहवारी शुरू होने से पहले और महावारी के दौरान पेट संबंधित समस्याएं भी उत्पन्न हो जाती है; उनके लिए भी पपीते का सेवन बहुत ही गुणकारी साबित होता है।

४) दालचीनी-

एक चम्मच दालचीनी का पाउडर एक गिलास पानी में डालकर थोड़ी देर तक उबालें और हल्का गुनगुना होने पर इसे छानकर पी ले। इस तरह से दालचीनी के पाउडर के पानी का सेवन करने से भी पीरियड खुलकर आने में मदद मिलती हैं। आप दालचीनी के पाउडर के अलावा दालचीनी का टुकड़ा भी इस्तेमाल कर सकते हैं। दालचीनी के पाउडर को दूध में मिलाकर पीने से भी पीरियड्स कम आने की समस्या में राहत मिलती है।

५) अजवाइन-

आधा चम्मच अजवायन के साथ हल्का गुनगुना हल्दी वाला दूध पीने से पीरियड्स ठीक से आने लगते हैं। आधा चम्मच अजवाइन एक गिलास पानी में डालकर आधे घंटे तक उबालें। बाद में इसे छान लें और एक चम्मच शहद मिलाकर इस पानी को दिन में दो से तीन बार पिए। ऐसा करने से पीरियड खुलकर आने में मदद मिलती है।

डॉक्टर की सलाह-

मासिक धर्म नॉर्मल तरीके से आना एक महिला के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। क्योंकि, हर महीने महिलाओं में कई सारे हार्मोनल बदलाव दिखाई देते हैं; जिनमें गड़बड़ी होने के कारण उनकी प्रजनन क्षमता पर भी बुरा असर पड़ सकता है। अगर आप पीरियड में ब्लीडिंग कम होने की समस्या को दो से तीन महीने तक अनुभव करती है; तो आपको तुरंत इसका निदान करने के लिए किसी गाइनेकोलॉजिस्ट से परामर्श लेनी चाहिए। दो से तीन महीने तक पीरियड का अनियमित होना, प्रेगनेंसी, पीरियड्स के दौरान गंभीर दर्द महसूस होना इन सभी मामलों में डॉक्टर से उचित सलाह लेना ही आवश्यक होता है। डॉक्टर से सलाह लेने के बाद डॉक्टर द्वारा बताए गए दिशा निर्देशों का अवश्य पालन करें और दी गई दवाइयां समय-समय पर लेते रहिए। आगे जाकर कोई भी परेशानी हो, तो तुरंत डॉक्टर के फॉलोअप के लिए जरूर जाएं।

तो दोस्तों, आज के लिए बस इतना ही। उम्मीद है, आपको आज का पीरियड का कम आना क्या होता है यह ब्लॉग अच्छा लगा हो। धन्यवाद।

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