गर्भपात के बाद कमजोरी कैसे दूर करें

नमस्ते दोस्तों, कैसे हो आप? आज का हमारा विषय है गर्भपात के बाद कमजोरी कैसे दूर करें, मां बनना हर महिला का सबसे प्यारा सपना होता है। मां बनने की खुशी होने पर उसकी जिंदगी खिलखिला उठती हैं। अपने बच्चे के लिए एक मां हजारों सपने बुनती हैं और उसके लिए कई सारे त्याग भी करती हैं। लेकिन, कई बार कई महिलाएं सपने को पूरा नहीं कर पाते हैं। गर्भपात होने की वजह से उनका यह सपना टूट जाता है। गर्भपात होने के बाद महिला के शरीर में पोषक तत्वों की अचानक से कमी आ जाती है।

हेवी ब्लीडिंग के कारण शरीर में आयरन, कैल्शियम की कमी हो जाती है; जिस कारण वह अधिक मात्रा में कमजोरी महसूस करने लगती है। दोस्तों, गर्भपात शारीरिक पीड़ा के साथ-साथ, मानसिक पीड़ा भी साथ लाता है। शरीर में हुई पोषक तत्वों की कमी मेडिसिन और दवाइयां लेकर पूरी की जा सकती है। लेकिन, भावनात्मक रूप से उबरने के लिए एक महिला को बहुत दिन लगते हैं।

प्रेगनेंसी की खुशखबरी के साथ एक महिला अपने बच्चे के लिए सपने देखना शुरू कर देती हैं और गर्भपात जैसी स्थिति बहुत ही दर्दनाक होती है और उसे वह आसानी से अपना नहीं पाती है। इसका सीधा परिणाम मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर होता है। तो इसमें परिवार की भी जिम्मेदारी बनती है; कि वह उस महिला का ध्यान रखें जो गर्भपात से गुजरी हो। तो दोस्तों, आज जानेंगे गर्भपात होने के बाद आई कमजोरी को दूर करने के लिए कौन से उपाय करें।

गर्भपात के बाद कमजोरी दूर करने के उपाय

गर्भपात के दौरान एक महिला बहुत सारे शारीरिक पीड़ा के साथ जूझती है। गर्भपात के बाद आई अचानक से कमजोरी उसे अंदर से अधिक कमजोर कर देती हैं। इसी के साथ, मानसिक रूप से भी वह अपने आप को संभालने में सक्षम नहीं होती हैं।

गर्भपात होने पर डॉक्टर से जांच, निदान और समस्या के गंभीरता को लेकर डॉक्टर आपको कुछ दवाइयां भी देते ही हैं। लेकिन, गर्भपात के बाद आई कमजोरी को दूर करने के लिए कुछ घरेलू उपाय अपना सकते हैं; जो सुरक्षित होते हैं।

१) कैल्शियम युक्त आहार-

गर्भपात होने के बाद महिला के शरीर में कैल्शियम की मात्रा तेजी से गिरती है और इसकी वजह से जोड़ों में दर्द, थकावट, कमजोरी महसूस होने लगती है। इस समस्या से निजात पाने के लिए कैल्शियम युक्त आहार का सेवन अवश्य करना चाहिए; जिससे कैल्शियम की मात्रा की आपूर्ति हो सके।

सीफूड, दूध, ड्राई फ्रूट्स, डेयरी प्रोडक्ट, सोयाबीन और हरी पत्तेदार सब्जियों का समावेश अपने आहार में जरूर करें। वैसे भी, गर्भपात के बाद डॉक्टर मरीज को कैल्शियम की गोलियां तो देते ही हैं। लेकिन, उनके साथ साथ ही आप अपने आहार में उचित बदलाव करें; जिससे कैल्शियम की मात्रा शरीर में बढ़ जाती है।

२) आयरन युक्त आहार-

जाहिर है, गर्भपात के बाद हेवी ब्लीडिंग के कारण शरीर में आयरन और हीमोग्लोबिन की कमी आ जाती है; जिससे एनीमिया की समस्या उत्पन्न हो जाती हैं। महिलाओं को इसी कारण थकावट और कमजोरी महसूस होती है। ऐसे में, अपने आहार में आयरन युक्त पदार्थों का सेवन करने से आयरन की मात्रा शरीर में बढ़ाई जा सकती है।

किशमिश, दाल, सोयाबीन, कद्दू के बीज, बीन्स, हरी पत्तेदार सब्जियां, डार्क चॉकलेट, ब्राउन राइस, सलाद, दही आदि पदार्थों को अपने आहार में अवश्य समावेश करें।

३) पर्याप्त आराम-

गर्भपात के बाद महिला के शरीर को आराम की सख्त जरूरत होती है। कई बार महिलाएं गर्भपात के कुछ दिनों बाद ही काम पर जाना शुरू कर देते हैं या घर के काम करना भी शुरू कर देती है; जो कि गलत बात है। डॉक्टर से उचित सलाह लेकर आराम का समय निश्चित करना चाहिए। इस दौरान घर के कामों से भी परहेज करना चाहिए और जितना हो सके, उतना आराम करना चाहिए। शरीर में आई पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने के लिए पोषक आहार के साथ साथ ही आराम भी बहुत जरूरी होता है; जिससे शरीर में आई थकावट को दूर किया जा सके।

४) पानी-

गर्भपात के बाद आई कमजोरी को दूर करने के लिए शरीर को हाइड्रेटेड रखना बहुत ही जरूरी होता है। पानी के अलावा आप नारियल पानी, फलों के जूस का भी सेवन कर सकते हैं। कई बार महिलाओं को इस दौरान उल्टी और दस्त की समस्या हो सकती है। इसीलिए, शरीर में पानी की कमी ना होने दें।

५) पेन किलर-

गर्भपात के बाद महिलाओं को बहुत दर्द और शारीरिक पीड़ा से गुजरना पड़ता है। पेट दर्द, जोड़ों के दर्द, मांसपेशियों में खिंचाव आने से महिलाएं बहुत ही कमजोर हो जाती है। यूटरस का सिकुड़ना इस दर्द का कारण होता है। इस समस्या के लिए डॉक्टर द्वारा बताए गए पेन किलर का वक्त वक्त पर अवश्य सेवन करें। दर्द कम ना होने पर डॉक्टर से दोबारा संपर्क करें।

६) मालिश-

गर्भपात के बाद महिला को शारीरिक पीड़ा से गुजरना पड़ता है। इस समस्या से राहत पाने के लिए हल्के हाथों से मालिश करना जरूरी होता है। पीठ तथा पेट के निचले हिस्से की मालिश करने से वहां का ब्लड सरकुलेशन बेहतर होता है; जिससे दर्द को कम किया जा सकता है। वहीं दूसरी ओर, हल्के हाथों से की गई मालिश मांसपेशियों को भी आराम और मजबूती दिलाती हैं; जिस कारण कमजोरी दूर होने में और मूड फ्रेश होने में भी मदद मिलती है।

मालिश करने के लिए सरसों का तेल, तिल का तेल या कोई भी तेल का इस्तेमाल किया जा सकता है। मालिश करते समय तेल को हल्का गुनगुना गर्म करें और उसके बाद हल्के हाथों से मालिश करें; इससे दर्द एवं मांसपेशियों की ऐंठन में जरूर आराम मिलेगा।

७) परिवार की जिम्मेदारी-

जाहिर है, गर्भपात के बाद मां के साथ साथ पूरा परिवार दुखी हो जाता है। लेकिन, सबसे अधिक पीड़ा मां को ही होती हैं। हमारे समाज में आज भी कई जगह महिलाओं को बच्चा ना होने के कारण दोषी माना जाता है; जो कि गलत है। गर्भपात होने के बाद एक महिला की मानसिक स्थिति समझना बहुत ही जरूरी होता है।

इस समय वह बहुत ही कठिन दौर से गुजर रही होती है और उसे अपने पति का और परिवार का साथ चाहिए होता है। मानसिक रूप से उसे इस दुख से उबरने के लिए परिवार का साथ बहुत ही आवश्यक होता है। इसीलिए, यह परिवार की जिम्मेदारी बनती है; कि वह उसे खुश रखने की कोशिश करें और उसका स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखें।

दोस्तों, गर्भपात का अनुभव किसी भी महिला के लिए दर्दनाक ही होता है। चाहे वह महिला फिजिकली और मेंटली कितनी भी स्ट्रांग हो; लेकिन गर्भपात के दुख को वह आसानी से पचा नहीं पाते हैं। इसीलिए, उसका खास ख्याल रखना बहुत ही जरूरी होता है।

गर्भपात के बाद आई कमजोरी को दूर करने के लिए ऊपर दिए गए नुस्खों को जरूर आजमाएं। अपने आप का ध्यान रखें और शरीर में हो रहे बदलावों पर उचित ध्यान दें। गर्भपात के बाद थोड़ी सी भी तकलीफ या अनचाहा परिवर्तन नजर आए; तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें, इसे नजरअंदाज ना करें।

तो दोस्तों, आज के लिए बस इतना ही। आज का टॉपिक बहुत ही संवेदनशील था। उम्मीद है, आपको आज का गर्भपात के बाद कमजोरी कैसे दूर करें यह ब्लॉग अच्छा लगा हो। धन्यवाद।

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