पाचन क्रिया को तंदुरुस्त कैसे बनाते हैं

नमस्ते दोस्तों, कैसे हो आप? आज का हमारा विषय है पाचन क्रिया को तंदुरुस्त कैसे बनाते हैं,अक्सर हम लोगों को कहते हुए सुनते हैं; कि अगर आप का पाचन तंत्र मजबूत हो, तो आपकी तबीयत सालों तक अच्छी बनी रह सकती है। यह बात काफी हद तक सच है। हमारा पाचन तंत्र हमारे पूरे ही शारीरिक कार्य प्रणाली के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। पाचन क्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी सीधा आपके स्वास्थ्य पर असर डालती है। एसिडिटी, गैस, कब्ज, बदहजमी और अपच जैसी समस्याएं पाचन क्रिया में आई गड़बड़ी के कारण हो सकती हैं। कभी-कभी बाहर का खाने के बाद हमें पाचन क्रिया में गड़बड़ी महसूस होती हैं; जो कि आम बात है। 

लेकिन, कई सारे लोगों को हमेशा ही पाचन संबंधित समस्या रहती हैं। ऐसे में, उनको इस समस्या के लिए उपाय ढूंढना जरूरी हो जाता है। बदली हुई खानपान पद्धति और जीवन पद्धति की वजह से हमें पेट संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। पिज़्ज़ा, बर्गर, कोल्ड ड्रिंक, सॉफ्ट ड्रिंक जैसे इंस्टेंट फूड का सेवन करने से हमारे पाचन तंत्र पर अधिक दबाव पड़ता है और उसमें खराबी आ जाती हैं। वहीं दूसरी ओर; सोने उठने की गलत आदतें, गलत टाइम पर गलत तरह का भोजन करना तथा एक्सरसाइज, व्यायाम का अभाव इन सब से शरीर में पेट में पाचन क्रिया में गड़बड़ी हो जाती है। हमें गैस, कब्ज, एसिडिटी, बदहजमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। 

कई बार यह समस्या इतनी बढ जाती है; कि बड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए, बेहतर है कि शुरुआत में ही इनके ऊपर इलाज शुरू कर दिया जाए। अपने आहार के पद्धति और जीवन शैली में उचित बदलाव करने से पेट संबंधित समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है। कई बार समस्या बड़ी होने पर डॉक्टर के पास जाने की जरूरत भी पढ़ सकती हैं। तो दोस्तों, आज जानेंगे पाचन क्रिया को तंदुरुस्त कैसे बनाते हैं

पाचन तंत्र की जानकारी

पाचन तंत्र गैस्ट्रो इंटेस्टिनाल ट्रैक्ट से बना होता है। इस ट्रैक्ट का मार्ग आपके मुंह से लेकर गुदा तक कई अंगों द्वारा जुड़ा होता है। इस मार्ग में इस मार्ग में कई सूक्ष्मजीवी भी होते हैं, जो हमारे पाचन क्रिया के लिए अच्छे होते हैं। गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट में अग्नाशय, लीवर, छोटी आंत, बड़ी आंत जैसे महत्वपूर्ण अंग शामिल होते हैं। पाचन क्रिया को सुचारू रूप से करने के लिए गुड बैक्टीरिया, तंत्रिकाएं हार्मोन, एंजाइम्स तथा कुछ इंटरनल ऑर्गंस महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पाचन की प्रक्रिया काफी जटिल होती है।

भोजन को मुंह में डालने के साथ ही आपके पाचन की प्रक्रिया की शुरुआत हो जाती है। मुंह में लार से मिलने के बाद और भोजन चबाने के बाद चबाया हुआ भोजन ग्रास नली से होकर सीधा पेट की ओर बढ़ता है। पेट में मौजूद एंजाइम्स और एसिड भोजन के पाचन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हैं। अग्नाशय कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन एवं फैट्स को अलग करना शुरू कर देता है और इन से निकला हुआ पाचक रस छोटी आत की तरह बढ़ाता है। 

लीवर पित्त रस का निर्माण करता है; जिससे फैट्स को पचाने में मदद मिलती है। लीवर से निकला पित्त रस आगे जाकर पित्ताशय को मिलता है। जैसे ही आप भोजन का ग्रहण करना शुरू करते हैं; वैसे ही पित्ताशय से पित्त रस छोटी आत में पहुंचना शुरू हो जाता है। छोटी आत पाचन रस को भोजन में मिलाती हैं और भोजन से कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फैट्स को अलग करना शुरू कर देती हैं। छोटी आत में कुछ ऐसे बैक्टीरिया पाए जाते हैं; जो कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन का पाचन करने में मदद करते हैं।

बड़ी आत में मौजूद बैक्टीरिया भोजन के पोषक तत्वों को निकालने के साथ-साथ, “विटामिन के” का निर्माण करती हैं। इसके बाद, भोजन से जो तत्व बच जाते हैं; वह मल बन कर मलाशय तक पहुंचते हैं। बड़ी आत से होकर जो मल मलाशय तक पहुंचता है; वह गुदा से होता हुआ शरीर से बाहर निकल जाता है। इस तरह से पाचन की यह प्रक्रिया पूरी होती हैं।

पाचन क्रिया तंदुरुस्त बनाने के लिए घरेलू नुस्खे

दोस्तों, हमारे आहार में ही हमारी सेहत का राज छुपा होता है। हमारा आहार अगर संतुलित एवं अच्छा हो, तो हमारी पाचन क्रिया भी तंदुरुस्त रहती हैं। बिगड़ी हुई पाचन क्रिया को तंदुरुस्त बनाने के लिए आज हम आपको कुछ घरेलू उपाय बताने वाले हैं, इनको आप जरूर अपनाएं।

१) प्रोबायोटिक्स-

प्रोबायोटिक्स के सेवन से हमारे पाचन तंत्र में पोषक तत्वों के अवशोषण को बढ़ावा मिलता है और हमारी इम्यूनिटी भी मजबूत होती है। प्रोबायोटिक्स दरअसल, पाचन तंत्र के अंदर मौजूद गुड बैक्टीरिया की तरह ही होते हैं। प्रोबायोटिक्स का सेवन करने से एंटी बायोटिक, स्ट्रेस और असंतुलित आहार के प्रभाव को कम करने में मदद मिलती हैं। प्रोबायोटिक्स का सेवन हमारे पाचन तंत्र को मजबूती दिलाता है और पाचन क्रिया में सुधार लाता है। इसी के साथ, इसका सेवन करने से इरिटेबल बाउल सिंड्रोम में भी काफी हद तक राहत मिलती है। आजकल मार्केट में प्रोबायोटिक्स है तरह तरह के प्रोडक्ट उपलब्ध होते हैं तथा दही के रूप में भी आप प्रोबायोटिक्स का सेवन कर सकते हैं।

२) फाइबर युक्त आहार-

पाचन क्रिया की समस्या से निपटने के लिए अधिक फाइबर युक्त पदार्थों का सेवन करना गुणकारी होता है। स्प्राउट्स, साबुत अनाज, फल, हरी पत्तेदार सब्जियां इन सभी पदार्थों में फाइबर प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इसीलिए, इन पदार्थों का सेवन अवश्य करना चाहिए। फाइबर युक्त पदार्थों का सेवन करने से हमारे पाचन तंत्र को मजबूती मिलती है और पाचन तंत्र में आई गड़बड़ी को भी कम करने में मदद मिलती है। वहीं दूसरी ओर, फाइबर युक्त पदार्थों का सेवन करने से इरिटेबल बाउल सिंड्रोम, कब्ज और पाइल्स जैसी बीमारियों का खतरा भी कम हो जाता है।

३) पानी-

हमारे शरीर में पानी की कमी होने के कारण पाचन तंत्र में गड़बड़ी आ सकती है और कब्ज, एसिडिटी जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकते हैं। पाचन तंत्र को मजबूती प्रदान करने के लिए और पेट संबंधित समस्याओं से दूर रहने के लिए उचित मात्रा में पानी पीना आवश्यक होता है। शरीर में पानी की कमी डिहाइड्रेशन का कारण भी बनती है; जिसका सीधा असर हमारे पाचन क्रिया पर पड़ता है। इसीलिए, दिन भर में उचित मात्रा में पानी पीना बहुत ही आवश्यक होता है।

वहीं दूसरी ओर, पाचन तंत्र को मजबूती प्रदान करने के लिए रोज सुबह हल्के गुनगुने पानी का सेवन अवश्य करना चाहिए। हल्के गुनगुने पानी में आधा नींबू निचोड़ कर और एक चम्मच शहद डालकर पीने से हमारे पाचन तंत्र को तो मजबूती मिलने साथ साथ, शरीर के टॉक्सिंस बाहर निकाले जाते हैं और हमारे पाचन तंत्र के सभी अंगों को डिटॉक्सिफाई किया जा सकता है।

४) दही-

दही और छाछ प्रोबायोटिक्स की तरह काम करते हैं। प्रोबायोटिक्स हमारे पाचन तंत्र को मजबूती प्रदान करते हैं और उसमें अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाते हैं। दही और छाछ का दिन में एक बार तो सेवन करना ही चाहिए। इनका सेवन करने से हमारे पाचन क्रिया को गति मिलती है और पेट संबंधित समस्याओं से हम दूर रहते हैं।

५) भोजन का निश्चित समय-

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हमें फुर्सत से बैठकर खाना खाने तक का वक्त नहीं मिल पाता है। ऐसे में, पेट संबंधित समस्याएं होना लाजमी है। पाचन तंत्र में गड़बड़ी होने के कारण डायबिटीज, मोटापा, हाई बीपी जैसी बीमारियों का हम शिकार होते जा रहे हैं। इन सभी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए अपने भोजन का एक निश्चित समय तय करें और उसी वक्त पर भोजन करने की कोशिश करें।

सुबह नाश्ता, दोपहर का खाना और रात का खाना वक्त पर लेने की आदत डालें। यह अच्छी आदत डालने से पाचन क्रिया में गड़बड़ी आने का खतरा कम हो जाता है। भोजन करते समय खाने को अच्छे से चबा चबा कर खाए।  हैल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, भोजन आधे से ज्यादा आपके मुंह में पचना शुरू हो जाता है। इसीलिए, भोजन अच्छे से चबाकर खाना पाचन क्रिया को बढ़ावा देता है।

६) शराब और धूम्रपान-

पाचन तंत्र की मजबूती बनाए रखने के लिए शराब एवं धूम्रपान करना तुरंत बंद करें। शराब, धूम्रपान तथा तंबाकू के पदार्थों का सेवन करने से लीवर तथा पाचन तंत्र के सभी अंगों पर बुरा असर पड़ता है। कभी-कभी ये असर इतना बुरा होता है; कि लिवर खराब होने तक की नौबत आ जाती हैं। 

७) एक्सरसाइज-

नियमित रूप से योगा, प्राणायाम, मेडिटेशन और एक्सरसाइज को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाने से हमारा शरीर रोगों से मुक्त रह सकता है। एक्सरसाइज एवं प्राणायाम करने से हमारा ब्लड सरकुलेशन उचित रूप से होता है और शरीर के सभी अंग उचित रूप से कार्य करते हैं। पाचन तंत्र को बढ़ावा देने के लिए भी आप एक्सरसाइज का सहारा ले सकते हैं। धनुरासन, वज्रासन जैसे योगासन करने से हमारे पेट की मांसपेशियों को मजबूती प्रदान होती हैं। इसी के चलते, हमारा पाचन तंत्र भी मजबूत होता है।

आमतौर पर, कोई भी आसन या एक्सरसाइज सुबह खाली पेट या दोपहर में खाना खाने के चार-पांच घंटे बाद की जाती है। लेकिन, वज्रासन एक ऐसा आसन है; जिसको आप खाना खाने के तुरंत बात कर सकते हैं। वज्रासन और धनुरासन का योगाभ्यास करने से ना सिर्फ आपके पेट की मांसपेशियां मजबूत होकर पाचन तंत्र को बढ़ावा मिलता है; बल्कि आपके रीड की हड्डी में मजबूत होती है।

तो दोस्तों, आज के लिए बस इतना ही। उम्मीद है, आपको आज का पाचन क्रिया को तंदुरुस्त कैसे बनाते हैं यह ब्लॉग अच्छा लगा हो। धन्यवाद।

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