दीपावली में दीया क्यों जलाते हैं

नमस्ते दोस्तों, कैसे हो आप? आज का हमारा विषय है दीपावली में दीया क्यों जलाते हैं,हमारे भारत देश की संस्कृति बहुत ही प्राचीन और समृद्ध है। हमारे भारत देश में कई तरह के त्यौहार बहुत ही धार्मिकता और प्यार से मनाए जाते हैं। भारतीय संस्कृति में मनाए जाने वाले हर त्योहार का अपना एक विशेष महत्व होता है। भारत देश के हर प्रांत में हर प्रकार का त्यौहार अलग-अलग प्रथाओं के साथ मनाया जाता है।

दोस्तों, प्रथाएं भले ही अलग हो; लेकिन भारतवासियों की खुशी और उनका प्यार एक ही होता है। त्योहारों के दिनों में हम विशेष तैयारियां करते हैं। भारतीय परंपरा में कई तरह के त्यौहार मनाए जाते हैं। रक्षाबंधन, होली, दशहरा, नवरात्रि, गणेशोत्सव, मकर संक्रांति, गुढीपाडवा, दीपावली यह सारे ही त्यौहार भारतवासी बड़े ही धार्मिकता और प्रथाओं के साथ मनाते हैं। हर एक त्यौहार में एक दूसरे के प्रति प्यार और सम्मान व्यक्त करने के लिए हम एक दूसरे को तोहफें भी देते हैं। 

भारतवर्ष का सबसे बड़ा त्यौहार “दीपावली” को माना गया है। दीपावली बुरे विचारों को पीछे छोड़कर भविष्य की ओर एक नए उत्साह के साथ देखने के का प्रतीक माना जाता है। दीपावली का पर्व अपने साथ ढेर सारी खुशियां ले आता है। दीपावली के मौके पर हम तरह-तरह के व्यंजन बनाते हैं; उसमें मिठाई और नमकीन जैसे हर तरह का पदार्थ मौजूद होता है। इसी के साथ, दीपावली में दिये जलाने का महत्व बहुत ही अलग और खास है।

अंधकार पर प्रकाश की विजय का पर्व दीपोत्सव को माना जाता है। दीपावली में दिए जलाने का मजा ही कुछ और होता है। बचपन में दीपावली को लेकर बहुत उत्सुकता देखी जाती हैं। बच्चों के साथ-साथ, बड़े भी दीपावली के पर्व के लिए हमेशा ही उत्सुक रहते हैं। दोस्तों, आज जानेंगे दीपावली में दीया क्यों जलाते हैं।

दीपावली क्यों मानते हैं

भगवान श्री रामचंद्र ने १४ वर्ष का वनवास अपनी पत्नी माता सीता और लक्ष्मण भैया के साथ बिताया। उस दौरान रावण राक्षस ने माता सीता का अपहरण किया। वानर सेना और रामभक्त मारुति की मदद से भगवान श्री रामचंद्र ने रावण का संहार कर माता सीता को अयोध्या वापस लाया। 

जिस दिन भगवान रामचंद्र ने माता सीता के साथ वनवास को खत्म करने पर अयोध्या नगरी में आगमन किया; उस दिन पूरी अयोध्या नगरी हर्षोल्लास से भरी हुई थी। भगवान रामचंद्र, माता सीता, लक्ष्मण भैया और रामभक्त मारुति का स्वागत करने के लिए अयोध्या वासियों ने दीपक जलाए। इसी दिन से दीपावली के इस पर्व की शुरुआत हुई और दीपावली में दिए जलाने को शुभ प्रतीक के रूप में माना जाने लगा। 

बुराई की अच्छाई पर जीत और अंधकार को पीछे छोड़ प्रकाश की ओर देखने की सीख हमें दीपावली से मिलती हैं। दीपोत्सव को भगवान विष्णु के गृहस्थ रूप का प्रभावी माना जाता है। दीपावली के दिन माता लक्ष्मी की पूजा विशेष फलदाई होती हैं और उस दिन माता विशेष रूप से प्रसन्नता होती है।

दीपावली में दिया क्यों जलाते हैं

दीपावली के दिन दिया जलाने का एक अलग ही महत्व होता है। रोशनी और खुशियों का त्योहार दीपावली को माना जाता है। दीया और उसकी ज्योति जीवन के समान ही ज्वलंत का उदाहरण माना गया है। अग्नि, वायु, जल, आकाश और पृथ्वी जैसे पंचमहातत्वों से दिए का निर्माण होता है और दिया प्रज्वलित होता है। 

हिंदू धर्म में प्रकाश यानी रोशनी की पूजा हमेशा ही सूर्य और अग्नि के रूप में की जाती हैं। दीपक जलाने से अंधकार और नकारात्मकता दूर होकर जीवन में एक सकारात्मक दृष्टिकोण लौट आता है। दीया अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक माना जाता है। धनतेरस से लेकर भाईदुज तक दिया जलाने की प्रथा पुराने जमाने से जल्दी आ रही है और आज भी वह कायम है। धनतेरस के दिन रात भर अखंड दिया जलाने से माता लक्ष्मी का विशेष वरदान प्राप्त होता है। 

दिया जलाना गरीबी को नष्ट करने के लिए और अपने जीवन में समृद्धि लाने के लिए माता लक्ष्मी की आराधना करने का जरिया होता है। दिवाली के दिनों में माता लक्ष्मी की आराधना के साथ-साथ, भगवान श्री गणेश जी का पूजन भी आवश्यक होता है। क्योंकि, बिना भगवान श्री गणेश जी का पूजन किए माता लक्ष्मी रुष्ठ होने की संभावना होती है। दीपावली में दीया जलाने से दरिद्री, दुख, रोग, पाप, संकट दूर होकर हमारे जीवन में समृद्धि, आरोग्य, संपदा, संपत्ति वापस लाने की कामना की जाती हैं।

दीपावली में दिया जलाने के पीछे अपने खुद के मन से अंधकार दूर होकर नई उम्मीद का दिया जलने की प्रार्थना भगवान से की जाती है। दीपावली में घर के हर कोने में दिया जलाने से घर में साल भर के लिए उर्जा इकट्ठी हो जाती हैं और सकारात्मकता बनी रहती हैं।

दीपावली में दीया जलाने के पीछे एक साइंटिफिक कारण भी है। सरसों के तेल में दिया जलाने से वातावरण में मौजूद विषैले घटक और कीटाणु नष्ट होकर वातावरण शुद्ध होता है। जिस कारण, मानव जाति पर किसी भी रोग की आपत्ति नहीं आती हैं। 

दीपावली में दीया जलाते समय एक मंत्र का उच्चारण उसकी सकारात्मकता को बढ़ा देता है। 

“शुभम् करोति कल्याणम, आरोग्यम् धनसंपदाम्, शत्रु बुद्धि विनाशाय, दीपं ज्योति नमोस्तुते।”

     हिन्दू धर्म के अनुसार, इस मंत्र का महत्व बहुत ही खास है। इस मंत्र का अर्थ है; कि  

“शुभ और कल्याण करने वाली, आरोग्य एवं धनसंपदा देने वाली, शत्रु के बुरे विचारों का और बुद्धि का नाश करने वाली दीपक के ज्योति को हमारा प्रणाम है।”

दोस्तों, दीवाली का त्योहार भारतवर्ष में ही नहीं; बल्कि दुनिया में मौजूद हर भारतीय के घर में मनाया जाता है। दीपावली का त्यौहार अपने साथ सकारात्मकता, खुशियां, प्यार, सम्मान लेकर आता है। दीपावली के इस पर्व को खास बनाता है, एक दिया! दिया जलाने से अंधकार को नष्ट किया जा सकता है और इसी खास संदेश के साथ आज हम आपसे विदा लेते हैं।

तो दोस्तों, आज के लिए बस इतना ही। उम्मीद है, आपको आज का दीपावली में दीया क्यों जलाते हैं यह ब्लॉग अच्छा लगा हो। धन्यवाद।

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