बुढ़ापे में कमजोरी दूर करने के उपाय

नमस्ते दोस्तों, कैसे हो आप? आज का हमारा विषय है बुढ़ापे में कमजोरी दूर करने के उपाय, हमारी जिंदगी के हर पड़ाव पर हमें कई अनुभव देखने को और सीखने को मिलते हैं। बचपन में हम नई नई चीजें सीखने के लिए बहुत ही एक्साइटिड होते हैं। हम जब युवा होते हैं, तो हम चुनौतियों को आसानी से फेस करते हैं। लगभग ४०-४५ उम्र तक हम कई सारे चैलेंज का सामना करके जिंदगी में सफल बनते हैं। लेकिन, इसी उम्र में हमें शारीरिक समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है। जब हम बुजुर्ग होते हैं, बुढे होते हैं, तब हमें आराम, परिवार के प्यार और सम्मान की जरूरत होती हैं। बुढ़ापे में कमजोरी महसूस होना काफी आम बात है।

जब हम बूढ़े होते हैं, तब हमारे हड्डियां तथा मांसपेशियों में ऐंठन हो जाती हैं, हमें हाई बीपी, डायबिटीज की समस्या हो जाती हैं। इसी के साथ, हमारे शरीर से कई सारे पोषक तत्वों की कमी आ जाती हैं। ऐसे में यह परिवार वालों की जिम्मेदारी है, कि बुढ़ापे में बुजुर्ग लोगों का अधिकतर ध्यान रखा जाए। उनके खाने पीने की चीजों का ध्यान रखना चाहिए तथा सम्मान के साथ उनका ख्याल रखना चाहिए। बुढ़ापे में खानपान की चीजों का अगर ख्याल रखा जाए, तो कमजोरी काफी हद तक कम की जा सकती है। तो दोस्तों, आज जानेंगे बुढ़ापे में कमजोरी दूर करने के उपाय

बुढ़ापे में कमजोरी के कारण-

बुढ़ापे में कमजोरी की तीव्रता अधिक रहती हैं, इसके कई कारण हो सकते हैं।

१) बुढ़ापे में लोग अधिक तनावग्रस्त और चिंता में डूबे रहते हैं।

२) किसी करीबी रिश्तेदार या करीबी दोस्त की मौत होने पर या उनके बिछड़ने पर बुजुर्ग लोग अधिक दुखी हो जाते हैं; जिससे कमजोरी आ सकती हैं।

३) बुढ़ापे में अक्सर डायबिटीज की वजह से भी कमजोरी महसूस होती है।

४) बुढ़ापे तक आते-आते हम दिल की बीमारियों का शिकार हो ही जाते हैं; ऐसे में हमें कमजोरी आ जाती हैं।

५) मांसपेशियों की कमजोरी, थायरॉयड, दवाओं का ओवरडोज, पोषक तत्वों की कमी तथा नींद की कमी आदि कारणों से कमजोरी आ जाती हैं।

बुढ़ापे में कमजोरी के लक्षण-

बुढ़ापे में कमजोरी की वजह से शारीरिक गतिविधियों में कमी आने लगती है। इसी के साथ, कमजोरी के कई अन्य लक्षण भी देखने को मिलते हैं।

१) चक्कर आना, शारीरिक गतिविधियों में कमी आना।

२) मांसपेशियों में जकड़न, ऐठन तथा जोड़ों में दर्द होना।

३) सिरदर्द, बदन दर्द होना।

४) आंखो की रोशनी कम होना।

५) सांस लेने में तकलीफ होना और सीने में दर्द होना।

६) बोलने में कठिनाई होना और कन्फ्यूजन होना।

बुढ़ापे में कमजोरी दूर करने के उपाय-

बुढ़ापे में खानपान की योग्य पद्धति तथा उचित रूप से किया गया व्यायाम शरीर को एनर्जी से भर देता है। तो आइए जानते हैं, बुढ़ापे में कमजोरी दूर करने के उपाय।

१) संतुलित आहार-

दोस्तों, हमारी जिंदगी में रोजमर्रा का आहार बहुत ही इंपॉर्टेंट रोल निभाता है। हम इसी बात पर ध्यान देने से चूक जाते हैं और कमजोरी का शिकार हो जाते हैं। बुढ़ापे में भी संतुलित आहार कमजोरी को दूर करने के लिए सबसे बेहतरीन उपाय साबित होता है। बुढ़ापे में अपने लिए एक डाइट प्लान तैयार कर लेना चाहिए और उसका पालन योग्य रीती से करना चाहिए। अपने आहार में फल, फलों के जूस, सब्जियां, सूप, प्रोटीन युक्त पदार्थ, दूध, दही तथा अंडी, मछली का समावेश आवश्यक होता है। बुढ़ापे में बैलेंस डाइट लेने से पाचन तंत्र को मजबूती मिलती है और इम्यूनिटी भी बढ़ती हैं। संतुलित आहार लेने से बुढ़ापे में कमजोरी दूर होकर हम पूरा दिन एनर्जी महसूस करते हैं।

२) विटामिन सी युक्त आहार-

विटामिन सी हमारे शरीर में एनर्जी बढ़ाता है और रोगप्रतिकारक क्षमता को भी बढ़ाता है। विटामिन सी का सेवन करने से बुढ़ापे में कमजोरी दूर हो सकती हैं। विटामिन सी युक्त फल जैसे; नींबू, मोसंबी, संतरा का जूस या फल के रूप में सेवन करने से बुढ़ापे में थकान एवं कमजोरी दूर हो जाती हैं। नींबू का पानी पीने से बॉडी डिटॉक्स होती है और शरीर में एनर्जी बनी रहती है। 

३) ड्राई फ्रूट्स-

ड्राई फ्रूट्स में एंटी ऑक्सीडेंट, प्रोटीन, फाइबर, विटामिंस तथा मिनरल्स की मात्रा भरपूर होती है। ड्राई फ्रूट्स का रोजाना तौर पर सेवन करने से बुढ़ापे में शरीर को पोषक तत्व मिलते हैं और इससे कमजोरी दूर होती हैं। किशमिश का सेवन करने से शरीर को उचित मात्रा में आयरन का पोषण मिलता है। बुढ़ापे में अक्सर कमजोरी का कारण आयरन की कमी और खून की कमी भी होता है। किशमिश तथा ड्राई फ्रूट्स का सेवन करने से शरीर में आयरन की मात्रा बनी रहती है और कमजोरी एवं थकान महसूस नहीं होती हैं।

४) दही-

बुढ़ापे में पाचन तंत्र कमजोर होना एक आम बात है। दही का सेवन करने से पाचन तंत्र को मजबूती मिलती हैं। क्योंकि, इसमें प्रोबायोटिक के गुण पाए जाते हैं; जो हमारी आंतो को स्वस्थ बनाए रखते हैं। दही में मौजूद प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट्स शरीर की थकान एवं कमजोरी को दूर करते हैं। दही पचने में भी काफी आसान होता है। इसीलिए, बुढ़ापे में दही का सेवन करने से कमजोरी दूर होने के साथ कई सारे लाभ मिलते हैं।

५) मूंग की दाल-

मूंग दालके साथ-साथ अन्य दलों में भी प्रोटीन की प्रचुर मात्रा होती है। लेकिन, बुजुर्गों के हिसाब से देखें तो मूंग दाल पचने में काफी हल्की होती हैं और मूंग दाल का सेवन करने से बुजुर्गों को प्रोटीन भी मिलता है। इसीलिए, मूंग दाल को आप रोटी के साथ खा सकते हैं या मूंग दाल का सूप बनाकर भी पी सकते हैं। बुढ़ापे में मूंग दाल जल्दी पच जाती है और इससे बुढ़ापे की कमजोरी भी दूर होती हैं।

६) अंडा-

अंडे में अधिक मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है। बुजुर्गों में प्रोटीन की कमी होने के कारण, उनकी कमजोरी को दूर करने के लिए अंडा एक बेहतरीन विकल्प साबित होता है। रोजाना तीन से पांच अंडे खाने से शरीर को उचित मात्रा में प्रोटीन मिलता है; जिससे कमजोरी दूर होती हैं। आप अंडे को उबालकर या आमलेट बना कर खा सकते हैं।

७) मेडिटेशन-

बुढ़ापे में कमजोरी के कारण और अन्य शारीरिक विकारों के कारण चिड़चिड़ापन आ जाता है। चिड़चिड़ापन बुढ़ापे में एक आम बात है। लेकिन, इस चिड़चिड़ाहट की वजह से भी कमजोरी आने लगती हैं। इससे दूर रहने के लिए ध्यान धारणा, योग, प्राणायाम, वॉक करना तथा हल्की कसरत का सहारा ले सकते हैं। बुढ़ापे में भी आप खुश रह सकते हैं। इसके लिए आप अलग-अलग तरीके अपना सकते हैं। मेडिटेशन करने से आपके दिमाग को शांति मिलती हैं तथा कसरत करने से आपकी मांसपेशियां मजबूत होती हैं और आप तरोताजा महसूस करते हैं। छोटे बच्चों के साथ वक्त बिताने से आप खुश रह सकते हैं। 

दोस्तों, बुढ़ापे में अपने घर के बुजुर्गों का ख्याल रखना हमारी संस्कृति में एक पुण्य का काम माना गया है। जिंदगी भर वह हमारे लिए कष्ट करते हैं और जब बुढ़ापे में हमारी उनको जरूरत होती हैं, तब हमने उनका साथ देना बहुत जरूरी हो जाता है। बुढ़ापे में कमजोरी को दूर करने के लिए हमने जो नुस्खे आपको बताए हैं, उनको आप जरूर अपनाएं।

तो दोस्तों, आज के लिए बस इतना ही। उम्मीद है, आपको आज का यह ब्लॉग अच्छा लगा हो। धन्यवाद।

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