अमृतधारा के फायदे और नुकसान

नमस्ते दोस्तों, कैसे हो आप? आज का हमारा विषय है, अमृतधारा के फायदे और नुकसान, हमारे भारत देश की प्राचीन संस्कृति में आयुर्वेद को काफी महत्व दिया जाता था। आज के मॉडर्न युग में एलोपैथिक और होम्योपैथिक की दवाइयों का काफी चलन है। लेकिन, आज भी कई ऐसे लोग हैं; जो आयुर्वेद पर भरोसा करते हैं और आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को अपनाते हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति को ना ही एक विकल्प के तौर पर देखी जानी चाहिए, बल्कि उसे खुले दिल से अपनाना चाहिए। आजकल की युवा पीढ़ी आयुर्वेद उपचारों की तरफ बढ़ती हुई दिखाई दे रही है।

आयुर्वेद में भी आजकल नई तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है और उसकी प्रभावशीलता को बढ़ाया जा रहा है। इसीलिए, आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति आज के दिनों में प्रसिद्ध होती जा रही है। आयुर्वेद में अमृत धारा के बारे में बताया गया है। अमृतधारा कई सारे सामग्रियों को एक करके बनती है। इसमें अजवाइन का सत, कपूर, नीलगिरी का तेल, लौंग का तेल, पुदीना का सत आदि चीजें होती हैं। अमृतधारा उल्टी, पेट में गैस, एसिडिटी, अपच, डायरिया जैसी बीमारियों पर प्रभावी होता है। इसी के साथ, वह दांतो के दर्द के लिए भी काफी असरदार होता है। तो आइए दोस्तों, जानते हैं अमृतधारा के फायदे और नुकसान के बारे में।

अमृत धारा बनाने की विधि

अमृतधारा को बनाने के लिए अलग-अलग सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता है। उचित प्रमाण के अनुसार इन सामग्रियों को एक साथ मिलाकर अमृतधारा बनती है। अमृतधारा को कांच की शीशी में ही रखना चाहिए। 

सामग्री- १) १०० ग्राम देसी कपूर

            २) १०० ग्राम अजवाइन पाउडर

            ३) ४० एमएल लौंग का तेल

            ४) ४० एमएल दालचीनी का तेल

            ५) १०० ग्राम लाल इलायची

            ६) १०० ग्राम पेपरमिंट

इस सामग्री को अच्छे से मिलाकर कांच की शीशी में रख दें। इसे प्लास्टिक बॉटल में ना रखें। इसे ठंडे स्थान पर रखना चाहिए। आपको अमृतधारा आयुर्वेदिक औषधि के दुकान पर भी बना बनाया मिल जाता है।

अमृत धारा के फायदे

अमृतधारा के कई फायदे होते हैं। कई रोगों तथा समस्याओं से निपटने के लिए अमृतधारा का इस्तेमाल किया जाता है।

१) पेट की समस्या-

पेट की समस्या जैसे; अपच, गैस, एसिडिटी, पेट में दर्द, ऐठन को प्रभावी रूप से ठीक करने के लिए अमृतधारा का इस्तेमाल किया जाता है। अमृतधारा को बनाने के लिए इस्तेमाल की गई सामग्री में सारे घटक अपने आप में शरीर के लिए काफी उपयुक्त होते हैं। अमृतधारा का इस्तेमाल करने से पेट में डाइजेस्टिव एंजाइम्स का स्तर उचित मात्रा में बना रहता है और पेट की समस्याओं से राहत मिलती है।

एक गिलास पानी में अमृतधारा की ३-४ बूंदे डालकर पीने से बदहजमी, पेट में दर्द, दस्त, उल्टी खत्म हो जाता है।

२) हैजा-

अमृत धारा हैजा की समस्या के लिए काफी लाभदायक होता है। एक चम्मच प्याज के रस में दो बूंदे अमृत धारा डालकर पीने से हैजा से राहत मिलती है।

३) कीट का काटना-

कीड़े के काटने से या मच्छर के काटने से त्वचा पर रेडनेस, जलन होती है; इसको प्रभावी रूप से कम करने में अमृतधारा काफी असरदार होती है। कॉटन बड पर अमृत धारा की एक से दो बूंद डालकर उसे प्रभावित जगह पर लगाए। ऐसा करने से मच्छर काटने के निशान और रेडनेस, जलन कम होने में मदद मिलती है।

४) सर्दी खांसी-

आमतौर पर हमें सर्दी, खांसी, जुकाम जैसी बीमारियां आसानी से हो जाती है। इनको ठीक होने में लगभग एक हफ्ते से ज्यादा वक्त लग जाता है। सर्दी, खांसी होने की वजह से हमारी छाती में बलगम जमा हो जाता है, सिर दर्द होता है और नाक में भी सांस लेने में तकलीफ होती है। इन लक्षणों को कम करने के लिए अमृतधारा की दो से तीन बूंदे रुमाल पर लगाकर इसे सुंगने से काफी आराम मिलता है।

५) दांतो का दर्द-

कॉटन बड पर अमृतधारा की एक से दो बूंदे लगाकर दांतों के बीच दबाकर रखें। इससे आपके दातों में हो रहा दर्द, झनझनाहट, मसूड़ों में सूजन जैसी समस्याओं से छुटकारा मिलता है। अमृतधारा की सामग्री में अजवाइन तथा लौंग का तेल शामिल होता है। यह घटक दातों की समस्याओं के ऊपर काफी प्रभावी होते हैं।

अमृत धारा के नुकसान

अमृतधारा के अनगिनत फायदों के साथ-साथ उसके कुछ नुकसान भी होते हैं। अमृतधारा का अधिक मात्रा में सेवन करने से शरीर को नुकसान भी हो सकता है। इसलिए बेहतर है, कि अमृतधारा का इस्तेमाल करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

  • अमृतधारा का अधिक मात्रा में सेवन करने से कुछ लोगों को चक्कर भी आते हैं।
  • अमृतधारा का अधिक मात्रा में सेवन करने से दस्त की समस्या उत्पन्न हो जाती है।
  • अमृतधारा का अधिक मात्रा में सेवन पेट में दर्द, मांसपेशियों में कमजोरी जैसी समस्याएं उत्पन्न कर सकता है।
  • दम घुटना, कोमा, दौरे जैसी समस्याएं भी अमृतधारा के अधिक सेवन से हो सकती हैं।
  • अमृतधारा के अधिक सेवन से कब्ज की समस्या भी हो सकती हैं।
  • दो वर्ष आयु से कम बच्चों और गर्भवती महिलाओं को अमृतधारा का सेवन नहीं करना चाहिए।

दोस्तों, आज के लिए बस इतना ही। उम्मीद है, आपको आज का यह ब्लॉग अच्छा लगा हो। धन्यवाद।

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