समाज में सबसे अच्छा आदमी कैसे बने
समाज में सबसे अच्छा आदमी कैसे बने

अच्छा आदमी निचे लिखे बाते सोचता और करता है 

वे माता-पिता शत्रु के सामान हैं जो अपने बच्चों को नहीं पढ़ाते। ऐसे अनपढ़ लोग सभा के बीच में उसी प्रकार शोभा नहीं पाते, जैसे हंसो के मध्य में बगुला शोभा नहीं देता। ऐसे लोग कभी भी उची सोच नहीं रख सकते वह कभी अच्छा आदमी नहीं बन सकता|

आपके अधिक से अधिक  लाड़-प्यार से पुत्र और शिष्य गुणहीन हो जाते है| और उसे पर सही ध्यान देने से वह गुणवान हो जाते है। भाव यही है कि शिष्य और पुत्र को यदि आपका ध्यान उसपर रहेगा तो वह  भय रहेगा|  वे गलत मार्ग पर नहीं जायेंगे। उसी तरह से आप अपने मन के मुताबित कम कर सकते हो| वह जिन्दगी में एक अच्छा आदमी जरुर होगा|

एकदिन में एक  श्लोक, या  कोई भी आधा श्लोक, या किसी  श्लोक का एक चरण, या उसका आधा ही पढ़ना अच्छा होता  है|  क्योकि ध्यान-अध्ययन आदि से ही आपका दिन सार्थक होता रहता है| यह एक अच्छा आदमी करता है|

स्त्री का छल-कपट , अपने लोगो से ही आपका अनादर, युद्ध से बचा हुवा शत्रु, दुष्ट राजा की अपनी सेवा, आपकी जीवन की दरिद्रता और अपने दुष्टों की होने वाली सभा| आपको हमेशा  बिना अग्नि के ही जला देते हैं| इससे कभी भी अच्छा आदमी दूर ही होना चाहिए|


नदी के किनारे के वृक्ष, दूसरे के घर में जाने वाली स्त्री,  मंत्री के बिना राजा,  यह कभी भी नष्ट हो सकते है| कुव की इनका कोई भी कार्य अच्छा नहीं होता है| इसमें कोई संदेह नहीं ये शीघ्र ही नष्ट होने वाले होते है| वह अच्छा आदमी जान लेता है|

ब्राह्मणों का सबसे बड़ा बल उसकी  विद्या है, उसी प्रकार राजाओं का सबसे बड़ा  बल उनकी अपनी एक अच्छी  सेना है, वैश्यों का बल उनका खुद का धन है और शूद्रों का बल सेवा-कर्म करने में होता है। यह सब जान लेना सिर्फ अच्छा आदमी ही समज सकता है|

जीवन में वेश्या निर्धन मनुष्य को, प्रजा अपने शक्तिहीन राजा को, पक्षी फलरहित रहने वाले  वृक्ष को व अतिथि भोजन करके कभी भी  उस घर को छोड़ देते हैं| यह सरे पराए लोग रहते है आप इन पर कोई हक़ नहीं जाते सकते| यह आपको कभी भी छोड़ कर चले जाते है| अच्छा आदमी सरे बाते के परिपूर्ण होता है|


कभी भी ब्राह्मण दक्षिणा ग्रहण करके उसकी यजमान को, शिष्य विद्याध्ययन करने के बाद अपने एक अच्छे  गुरु को और हिरण जले हुए वन को त्याग देते है। यह सब एक न एक दिन अपने असली जगा देख लेते है| और तक सब त्याग कर चले जाते है|  अच्छा आदमी समजदार होता है|

जो भी बुरा आचरण करने वाला साथ रहने से, पापी दॄष्टि रखने वाले का साथ करने से रहने से तथा अशुद्ध स्थान पर रहने वाले से| और जो इन जैसे  मित्र के साथ मित्रता निभाता है वह शीघ्र नष्ट हो जाता है। यह सब अपने जीवन में सिख लेते है वही एक दिन अच्छा आदमी बनता है|
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कभी भी मित्रता बराबर वालों में शोभा देती है, सेवा राजा को ही शोभा देती है, व्यवहार में कुशलता वैश्यों को और घर में सुंदर स्त्री शोभा देती है| आपको कभी भी शोभा देती है| वही एक अच्छा आदमी की पहचान बनती है|

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